तुम सामने रसोई के दाल
बीनती हो
मैं हाथ में कलम लिये तुम्हें देखता हूँ
तुम होंठों से चुप रहती हो
मैं कानो से सब कुछ सुनता हूँ
मैं हाथ में कलम लिये तुम्हें देखता हूँ
तुम होंठों से चुप रहती हो
मैं कानो से सब कुछ सुनता हूँ
तुम्हारा ख़याल साथ लिये
साथ रहता हूँ
दिल में बहुत कुछ है मगर
कुछ न कहता हूँ
साथ रहता हूँ
दिल में बहुत कुछ है मगर
कुछ न कहता हूँ
क्या कहना
हर रिश्ते की मजबूरी है
क्या प्यार में
दूर रहना जरूरी है
हर रिश्ते की मजबूरी है
क्या प्यार में
दूर रहना जरूरी है
इसलिये साथ रहता हूँ
और कुछ न कहता हूँ।
और कुछ न कहता हूँ।
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