Sunday, 12 June 2016

live in Relationship


तुम सामने रसोई के दाल बीनती हो
मैं हाथ में कलम लिये तुम्हें देखता हूँ
तुम होंठों से चुप रहती हो
मैं कानो से सब कुछ सुनता हूँ
तुम्हारा ख़याल साथ लिये
साथ रहता हूँ
दिल में बहुत कुछ है मगर 
कुछ न कहता हूँ
क्या कहना 
हर रिश्ते की मजबूरी है
क्या प्यार में
दूर रहना जरूरी है

इसलिये साथ रहता हूँ
और कुछ न कहता हूँ।

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