आस्तीनें बिना चढ़ाये,
आँखों को बिना लाल बनाये।
कहते रहे अब तक, समझाते रहे अब तक।
पर कब तक,
कब तक हम यूँही
उम्मीदों के सहारे
मांगते रहेंगे अपने हक़ हर द्वारे।
तो दोस्तों जो तुम्हारा, जो तुमको बहुत प्यारा है। बढ़ो और तादात में
इतना कि खुद हथियार डल जाये
तुम्हारे हक़ो के आगे।
आँखों को बिना लाल बनाये।
कहते रहे अब तक, समझाते रहे अब तक।
पर कब तक,
कब तक हम यूँही
उम्मीदों के सहारे
मांगते रहेंगे अपने हक़ हर द्वारे।
तो दोस्तों जो तुम्हारा, जो तुमको बहुत प्यारा है। बढ़ो और तादात में
इतना कि खुद हथियार डल जाये
तुम्हारे हक़ो के आगे।
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