शहतूत का पेड़
कहते हैं
तब यहाँ एक भी गाड़ी नहीं थी
न ऐसी सड़कें, न इमारतें ऐसी थीं
कहते हैं तब मैं छोटा था
सब कहते हैं
कि अब मैं बड़ा हो गया हूँ
तब यहाँ एक भी गाड़ी नहीं थी
न ऐसी सड़कें, न इमारतें ऐसी थीं
कहते हैं तब मैं छोटा था
सब कहते हैं
कि अब मैं बड़ा हो गया हूँ
मैं फिर से ऐसा सुनते ही
बचपन की उस याद में खो जाता हूँ
जहाँ वो शहतूत का पेड़
मेरे बचपन में बड़ा हो चुका था।
जहाँ गिलहरियाँ
और वो पीली चोंच वाली
काली गोरैया अठखेलियाँ खेलती थीं।
जहाँ चिड़ियों को पानी के छोटे सोतो में
नहाते देखा जा सकता था
जहाँ मैं बच्चा था
बाकि थे सब बड़े
बचपन की उस याद में खो जाता हूँ
जहाँ वो शहतूत का पेड़
मेरे बचपन में बड़ा हो चुका था।
जहाँ गिलहरियाँ
और वो पीली चोंच वाली
काली गोरैया अठखेलियाँ खेलती थीं।
जहाँ चिड़ियों को पानी के छोटे सोतो में
नहाते देखा जा सकता था
जहाँ मैं बच्चा था
बाकि थे सब बड़े
फिर एक दिन
गली के छोर पर
पूरी बुलंदी से खड़ा
और अभिवादन में झुका
शहतूत का वो पेड़
बड़ों के लिये समस्या बनने लगा
क्योंकि गाड़ियाँ बढ़ने लगीं
और कम पड़ने लगी
उनको खड़ी करने की जगह
सो पेड़ कट गया
पेड़ का कटना
दरअसल मेरे बचपन का कटना था
उन गिलहरियों का बसेरा
पंछियों का डेरा
उन शहतूतों के गुच्छों का
खत्म होना था
सिर्फ एक पेड़ के कटने से
हमारे बचपन के जमघट छिन चुके थे
इसके बाद
मैं सीधे बड़ा हो गया।
गली के छोर पर
पूरी बुलंदी से खड़ा
और अभिवादन में झुका
शहतूत का वो पेड़
बड़ों के लिये समस्या बनने लगा
क्योंकि गाड़ियाँ बढ़ने लगीं
और कम पड़ने लगी
उनको खड़ी करने की जगह
सो पेड़ कट गया
पेड़ का कटना
दरअसल मेरे बचपन का कटना था
उन गिलहरियों का बसेरा
पंछियों का डेरा
उन शहतूतों के गुच्छों का
खत्म होना था
सिर्फ एक पेड़ के कटने से
हमारे बचपन के जमघट छिन चुके थे
इसके बाद
मैं सीधे बड़ा हो गया।
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